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स्कूली वाहन नियमों को ताक पर रख कर दे रहें हैं हादसों को न्यौता


Haridwar:

हरिद्वार। यूपी के कुशीनगर में मानवरहित रेलवे क्रांसिग पर स्कूली वैन के ट्रेन की चपेट आने से 13 बच्चों की मौत हादसे में वैन चालक की लापरवाही सामने आने के बाद इस घटना से हरिद्वार यातायात पुलिस सबक लेने को तैयार नहीं दिखाई दे रही हैं। कहने को सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा हैं। मगर सड़कों पर सरपट दौड़ रहे ओवर लोडिंग वाहन पुलिस को खुली चुनौती दे रहे हैं। हर बार एहतियात के तौर पर पुलिस सघन चेकिंग अभियान चलाने के दावे तो करती हैं लेकिन नियम विरूद्ध वाहन संचालन पर यदा कदा कारवाई तक सिमित रहते अपने कर्तव्य से इतिश्री कर लेती हैं। मगर वास्तविकता धरातल में इन कारवाई दावों से इतर हैं। खुलेआम नियमों को ताक पर रख कर वाहन चालक वाहनों चलाते समय मोबाईल का प्रयोग करने के साथ ही स्कूली वाहनों में ओवर लोडिंग तक करने से बाज नहीं आ रहे हैं। सड़कों पर अक्सर ऐसे नजारे देखें जा सकते हैं। जिलेभर में तमाम प्राईवेट स्कूल खुले हैं। जिनमें कई ऐसे स्कूल भी शामिल हैं जिनके स्कूली वाहन नियमों को ताक पर रख कर हादसों को न्यौता दे रहे हैं। प्राईवेट स्कूलों से बसों सहित तीन पहिया और चैपहिया वाहनों का भी संचालन किया जाता हैं। जिसमें बच्चो की संख्या वाहन की लिमिट से अधिक होती हैं। न ही यातायात पुलिस का इस ओर ध्यान हैं और न ही स्कूल प्रबंधन का। स्कूल प्रबंधन का ध्यान बच्यों की सुरक्षा को लेकर कम और फीस वसूली , किताबें , कापी व स्कूली ड्रेस पर कमीशनखोरी में अधिक दिखाई देता हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने दुर्घटनाओं पर नियंत्रण के लिए वाहनों को निर्धरित गति सीमा परिचालन के लिए स्पीड गवर्नर लगाना सभी राज्यों में अनिवार्य किया हुआ है। अब जांच का विषय हैं कि केन्द्रीय मंत्रालय का सुरक्षा के मद्देनजर जारी किए गए आदेशों का कितने स्कूल अनुपालन कर रहे हैं और कुशीनगर में ड्राईवर की लापरवाही से हुए हादसे से सबक लेकर पुलिस प्रशासन व परिवहन विभाग बच्चों के जिंदगी को खतरे में डालने वालों पर कितनी कानूनी कार्रवाई करते दिखाई देंगे।

ये हैं मानक-
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. वाहन का शैक्षणिक संस्था के नाम से पंजीकृत होना आवश्यक है।
. निजी आॅपरेटर भी अपने वाहन को स्कूल वाहनों के मानक के अनुरूप बनवाकर ही स्कूल बस के रूप में प्रयुक्त कर सकते हैं।
. प्रत्येक स्कूल बस के आगे पीछे मोटे अक्षरों में स्कूल बस लिखा होना जरूरी है। साथ ही आॅन स्कूल डयूटी भी लिखा होना चाहिए।
. स्कूल बस पर स्कूल का टेलीफोन नंबर लिखा होना चाहिए।
. स्कूल बस पंद्रह वर्ष से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए।
. प्रत्येक स्कूल बस में बच्चों के नाम की सूची एवं रूट चार्ट अनिवार्य रूप से होना चाहिए।
. स्कूली वाहन में अग्निशमन यंत्र लगा होना चाहिए।
. प्रत्येक स्कूल बस में फस्र्ट एड बाॅक्स अनिवार्य है।
. वाहन की अधिकतम गति 40 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित है। इसके लिए बस में स्पीड कंट्रोल यंत्र अवश्य लगा होना चाहिए।
. वाहन का गेट फिट एवं अच्छी तरह स बंद होने वाला होना चाहिए।
. बसों में आरामदेह सीट होनी चाहिए। इसके साथ ही एक साइड आर्मरेस्ट होना चाहिए।
. प्रत्येक सीट पर सेफ्टी बेल्ट होनी चाहिए।
. बस की खिड़की पर जाली होनी चाहिए।

क्या कहते हैं अधिकारी-
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समय-समय पर अभियान चलाकर स्कूली वाहनों की चेकिंग की जाती है। सघन चेकिंग अभियान शुरू किया जाएगा। स्कूलों में भी जाकर छात्र-छात्राओं व शिक्षकों को भी सुरक्षा के ऐहतियात इस विषय में जागरूक किया जाऐगा । स्कूल प्रबंधन को वाहन संचालन संबंधी नियमों का पालन करने के लिए सख्त निर्देश दिए जाऐंगे । 
-ममता बोहरा , एसपी सिटी हरिद्वार ।
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स्पीड गर्वनर डिवाईस लगवाने के लिए पहले से ही स्कूल प्रबंधनों का निर्देशित किया जा चुका हैं । अब व्यवसायिक वाहनों को भी इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। पुराने वाहनों को परिवहन विभाग में फिटनेस प्रमाण पत्र लेने से पूर्व स्पीड गर्वनर डिवाईस लगवाने पड़ेंगेे तभी फिटनेस प्रमाण पत्र विभाग जारी करेगा। 
-मनीष तिवारी, एआरटीओ हरिद्वार।
- यू.एस. न्यूज

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