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सूचना न देने पर मुख्य सूचना आयुक्त ने हविप्रा अधिकारी को लगाई फटकार


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Haridwar:

सूचना न देने पर मुख्य सूचना आयुक्त ने हविप्रा अधिकारी को लगाई फटकार,
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दो साल में कितने धवस्तीकरण हुए आदेश और कितनों पर हुई कारवाई देना होगा हिसाब
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पूर्व में सूचना न देने पर लग चुका हैं लोक सूचना अधिकारी पर 10 हजार का जुर्माना
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हरिद्वार। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार समय पर सूचना न देने पर हविप्रा अधिकारी को आयुक्त ने जमकर फटकार लगाई हैं। बताया जा रहा हैं कि विगत वर्ष 2018 में उत्तरी हरिद्वार निवासी आरटीआई कार्यकर्ता सतीश चन्द्र शर्मा ने हरिद्वार-रूड़की विकास प्राधिकरण से ऐसे अनाधिकृत मकानों, भवनों, व व्यवसायिक निर्माणों के धवस्तीकरण सहित कुल 7 बिन्दुओं पर सूचना मांगी थी। आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा मांगी गई बिन्दुवार सूचना में बिन्दु -1, पर अनाधिकृत निर्माणों पर एचआरडीए अधिकारियों द्वारा धवस्तीकरण के आदेश पारित किए हुए हैं। साथ ही इसी सूचना के बिन्दु -2 ,में धवस्तीकरण के पारित आदेशों के अनुपालन में की गई धवस्तीकरण की कारवाई के विषय में जानकारी मांगी थी। इस संबंध में एचआरडीए के लोक सूचना अधिकारी ने कार्यालय में सूचना धारित नहीं होने की बात कहते हुए वित्तीय वर्ष वार वाद पंजिकाओं में अंकित होने की जानकारी मुहैया कराने साथ ही मांगी गई सूचना पर वाद पंजिकाओं का अवलोकन करने के लिए अलग से आवेदन करने के लिए सूचना में उल्लेंख किया गया था। मिली जानकारी से असंतुष्ट होकर आरटीआई कार्यकर्ता सतीश चन्द्र शर्मा ने एचआरडीए के प्रथम अपीलीय अधिकारी हरिद्वार- रूड़की विकास प्राधिकरण के समक्ष प्रथम अपील दायर की थी। लेकिन वहां भी मांगी गई सूचना की गंभीरता पर न जाकर केवल औपचारिकतापूर्ण कर विभागीय लोक सूचना अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी को ही मान्य करार दे दिया गया। तत्पश्चात् शर्मा ने सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई 7 बिन्दुओं की जानकारी दिलाए जाने के लिए द्वितीय अपीलीय अधिकारी राज्य सूचना आयोग उत्तराखण्ड, देहरादून के समक्ष द्वितीय अपील दायर की । जिसके बाद अपील की तयतिथि पर सुनवाई करते हुए मुख्य सूचना आयुक्त ने एचआडीए के लोक सूचना अधिकारी के प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित विभागीय जेई को सूचना से संबधित प्रकरण पर सुनवाई करने के दौरान जमकर फटकार लगाई। मुख्य सूचना आयुक्त ने हरिद्वार-रूडकी विकास प्राधिकरण से संबंधित सूचना के लंबित प्रकरण पर सुनवाई करते हुए तय समयावधि पर सूचना न दिए जाने गंभीर माना और अपील की सुनवाई में पहंुचे लोक सूचना अधिकारी के प्रतिनिधि को आड़े हाथों लिया । एचआरडीए की आरटीआई से संबधित लंबित प्रकरण की समीक्षा के साथ ही मुख्य सूचना आयुक्त ने विगत दो वर्षो में एचआरडीए ने जितने भी मकान , दुकान व भवनों के धवस्तीकरण के आदेश पारित किए हैं व जितने आदेशों के अनुपालन में कारवाई की हैं, उन सभी की सूची व जिन-जिन क्षेत्रीय अधिकारियों के कार्यकाल में यह अवैध निर्माण हुए उनसे संबंधित सूचना उपलब्ध करवाने के लिए विभागीय अधिकारी को आदेशित करते हुए अपील का मौके पर ही निस्तारण कर दिया। मुख्य सूचना आयुक्त के आदेश के बाद से एचआरडीए अधिकारियों में हड़कंप हैं और अधिकारी बुझे मन से कार्यालय में धूल फांक रही फाईलों की धूल साफ कर सूचना एकत्रित करने में जुटे हुए हैं। बताया जा रहा हैं कि इससे पूर्व में भी आयोग ने एक मामले में सूचना न दिए जाने पर एचआरडीए के लोक सूचना अधिकारी पर 10 हजार रूपए का जुर्माना ठोंका हैं। बावजूद उसके सूचना के अधिकार में आवेदकों को विभागीय अधिकारी सही व समय पर सूचना मुहैया नहीं करा रहे हैं।

फाईलों में सिमटे धवस्तीकरणों के आदेशों की खुलेगी पोल !
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सतीश चन्द्र शर्मा को द्वारा लगाई गई आरटीआई के अनुसार यदि विगत दो वर्ष में हुए धवस्तीकरण की सूचना मिलते ही ऐसे कई अनाधिकृत निर्माण हैं, जिनमें बिल्डरों द्वारा विभागीय सेटिंग से फाईल पर तो धवस्तीकरण के आदेश पारित करवा लिए गए ,लेकिन धरातल पर इन आदेशों का अनुपालन कहीं हुआ ही नहीं। जिसके बाद फाईल बंद कर दी गई। सूचना मिलने पर ऐसे कई मामले सामने निकल आऐंगे , जो विभागीय कार्यशैली को तो उजागर करेंगे ही साथ ही अनाधिकृत निर्माण के धवस्तीकरण के संबंध में पारित आदेशों की भी पोल खोलेंगे। -यू.एस. न्यूज

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