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मेला अस्पताल में अव्यवस्थाओं का बोलबाला!


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Haridwar:

मेला अस्पताल में अव्यवस्थाओं का बोलबाला!
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बिना दरवाजो का शौचालय 
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मरीजों को उठानी पड़ रही है परेशानी
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हरिद्वार। बिल्केश्वर रोड़ पर बना मेला अस्पताल कहने को तो मेला अस्पताल हैं लेकिन मेला अस्पताल में हर तरफ अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। एक तरफ जहां अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को डाॅक्टरों की कमी से जूझना पड़ रहा है। वहीं शौचालय की स्थिति भी खराब होने के कारण मरीजों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। जबकि नालियों में पसरी गंदगी भी स्वच्छता अभियान को पलीता लगा रही है। अस्पताल में चिकित्सकों की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं अस्पताल के शौचालयों की स्थिति भी ठीक नहीं है। सार्वजनिक शौचालयों का दरवाजा टूटा पड़ा है। दरवाजे टूटे होने के चलते अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही हैं। अस्पताल की नालियों में गंदगी बह रही है। कुल मिलाकर स्वच्छता अभियान को अस्पताल परिसर में ही पलीता लग रहा है। जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं का बोलबाला खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। कभी मरीजों को डाॅक्टर नहीं मिलते हैं तो कभी सुविधाओं के नाम पर परेशान होना पड़ता है। बीते दिनों बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण डायलिसिस मशीने ठप्प हो गई। जिसमें डायलिसिस कराने आए 10 व्यक्तियों में से एक की मौत हो गई। डायलिसिस करा रहे अन्य 9 मरीजों को बामुश्किल बचाया जा सका। अस्पताल पहंुचकर ली गई जानकारी में हैरान करने वाली बात सामने आई पीपीपी मोड पर संचालित डायलिसिस यूनिट में स्टाफ ही पर्याप्त नहीं था। जरूरत पड़ने पर एक आक्सीजन गैस सिलेंडर में गैस नहीं थी तो दूसरे सिलेंडर में आक्सीजन गैस का रिसाव हो रहा था। मेला अस्पताल में खड़ी एम्बुलेंस भी समय पर अस्पताल में भर्ती मरीज की तबीयत बिगड़ेने पर हाई सेंटर रेफर किए जाने पर तकनीकी कारणों के चलते काम न आ सकी। अस्पताल परिसर बिजली आपूर्ति बाधित होने पर रखे जनरेटर की ठंकी का तेल सप्लाई का पाईप फटा हुआ था। शिकायत करने के लिए जिन अधिकारियों के नम्बर डायलिसिस यूनिट के बाहर लगी पट्टिका पर लिखे थे, मौके पर उन फोन नंबरों पर संपर्क ही नहीं हो पाया और तो और ऐन वक्त पर सीएमओं का फोन बंद किया जाना गैरजिम्मेदारना व्यवहार मरोजों के तकलीफदेय रहा। बिमारी से जूझ रहे मरीज अस्पताल में अपने उपचार के लिए पहंुचते हैं। लेकिन सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं का टोटा मरीजों की मौतों की वजह बन रहा हैं। बावजूद उसके सरकारी अस्पतालों की सुध नहीं ली जा रही हैं। प्रदेश सरकार इस पर भी गंभीर नहीं दिखती हैं। सरकार व सरकारी सिस्टम की लापरवाही आम आदमी भुगत रहा हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के यह हालात तब हैं जबकि स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा खुद प्रदेश के मुखिया के कंधों पर हैं। हलांकि स्वास्थ्य महानिदेशक डाॅ रविन्द्र थपलियाल ने मामले की जांच बैठा दी हैं। लेकिन जांच से क्या अस्पताल में पसरी अव्यवस्थाओं के हालात सुधर पाऐंगे? सवाल इस बात का हैं,क्यूंकि प्रदेशभर में सरकारी अस्पतालों के क्या हालत हैं? चिकित्सकों के अभाव में किस दौर में है? यह किसी से छुपा हुआ नहीं हैं। -यूएस न्यूज

 
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