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मित्र पुलिस का अमानवीय चेहरा हुआ उजागर, अनुशासन प्रिय डीजीपी के पुलिसकर्मियों की करतूत से खाकी हुई दागदार!


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Haridwar:

संशोधित समाचार: -
मित्र पुलिस का अमानवीय चेहरा हुआ उजागर, अनुशासन प्रिय डीजीपी के पुलिसकर्मियों की करतूत से खाकी हुई दागदार!
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अनिल बिष्ट-उत्तराखण्ड/हरिद्वार। उत्तराखण्ड प्रदेश के ईमानदार व अनुशासन प्रिय डीजीपी अनिल रतूड़ी भले ही सूबे के पुलिसकर्मियों को कितना ही नसीहत का पाठ पढ़ा ले, लेकिन उत्तराखण्ड पुलिस है कि मानती नहीं और जनाब, अनुशासन तो जानती ही नही हैं। जीरो टाॅलरेंस की त्रिवेन्द्र सरकार की उत्तराखण्ड पुलिस ने सारी हदें पार कर दी हैं। भले ही हमे आजाद हुए 70 सालो से ज्यादा हो गए है और हम एक लोकतान्त्रिक देश में रहते है, लेकिन जनता अभी भी पुलिस कार्य प्राणाली एवं व्यवहार को ब्रिटिश के ज़माने के दमनकारी नीतियों से ही तुलना करती है। एक तो पहले ही देहरादून में रणवीर फर्जी इनकाउंटर मामले में मित्र पुलिस ने खासा नाम रोशन किया हुआ हैं। जिसके दाग आज-तक धुल नहीं पाएं हैं, लेकिन यहां इससे भी सबक न लेने वाली मित्र पुलिस अपनी करतूतों से बाज नहीं आ रही हैं। वर्दी वाला रक्षक कम , भक्षक अधिक की भूमिका में नजर आ रहा हैं। जिस वजह से आम और खास का विश्वास पुलिस से उठता जा रहा हैं। इसका कारण हैं कि मित्र पुलिस का यह एक इकलौता मामला नहीं हैं। प्रदेश भर में ऐसे दर्जनों मामले हैं। जिन मामलों में अगर गौर किया जाए तो विभागीयकर्मियों की करतूतों की वजह से ही मित्र पुलिस कई बार दागदार ही नहीं हुई , बल्कि शर्मशार भी हुई हैं। सूत्रानुसार मित्र पुलिस की छवि दागदार और शर्मशार किसी और ने नहीं बल्कि खुद वर्दी वालों ने अपने कारनामों से कराई हैं। इन्हीं कारनामों की श्रंृखला में उत्तराखण्ड की पुलिस ने पत्रकार संग मारपीट कर एक नया मामला और जोड़ दिया हैं। ताजा मामला रूड़की में जन्माष्टमी की रात स्थानीय पत्रकार के साथ गंगनहर कोतवाली पुलिसकर्मियो द्वारा की गई मारपीट का हैं। पत्रकार के साथ जिस तरीके से मारपीट की गई हैं उसमें मित्र पुलिस का अमानवीय चेहरा एक बार फिर से उजागर हुआ हैं। इस घटना के बाद से पत्रकारों में खासा रोष हैं और इसी के चलते प्रदेश भर में पुलिस प्रशासन की खासी किरकिरी हो रही हैं। हलांकि कप्तान सेंथिल अबुदई कृष्णराज एस ने एसपी देहात को इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं। बताया जा रहा हैं कि एसपी देहात ने इस प्रकरण की जांच क्षेत्राधिकारी को दे दी हैं। लेकिन, सवाल यह उठता हैं कि घंटो बीत जाने के बाद भी मारपीट के आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ अभी तक कोई कारवाई नहीं हुई हैं? सवाल यह भी हैं कि आखिर मित्र पुलिस अपराधियों की धरपकड़ के समय लाठी ,डंडे ,फट्टा, सख्ताई पर मानवाधिकार का लेबल क्यों चिपक जाता हैं? और बेगुनाहों पर मनावाधिकार का पाठ पढ़ाने वाली पुलिस उसी मनावाधिकार का पाठ क्यों ,कैसे भूल जाती हैं ? पत्रकारों के संगठन के साथ - साथ राजनैतिक , व्यापारी व समाज सेवियों ने पुलिस की इस अमानवीयता की कड़ी निदंा की हैं। लोगों का कहना हैं कि जब मित्र पुलिस का पत्रकारों के साथ यह र्दुव्यवहार हैं तो आम आदमी के साथ कैसा व्यवहार होगा? इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती । जिस तरीके का गंगनहर कोतवाली के पुलिसकर्मियों द्वारा इतना अमानवीय व्यवहार पेश किया हैं उससे प्रदेशभर के पत्रकार संगठनों में इस घटना के बाद से पुलिस के खिलाफ आक्रोश देखने में आ रहा है। इसके साथ ही समाजिक व राजनितिक संगठनों से जुड़े व्यक्तियों ने इस घटना पर अपनी नाराजगी जताते हुए न सिर्फ घटना की निंदा की हैं बल्कि आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कारवाई करने की प्रदेश सरकार से मांग की हैं। ज्वालापुर विधान सभा से भाजपा विधायक सुरेश राठौर ने पुलिस द्वारा पत्रकार के साथ की गई मारपीट की घटना को अमानवीयता करार दिया जाने के साथ ही बेहद शर्मनाक बताया हैं। झबरेड़ा विधान सभा से भाजपा विधायक देशराज कर्णवाल ने भी घटना की निदंा करते हुए आरोपियों के खिलाफ कारवाई की मांग की हैं। वहीं इस पत्रकार संग हुई मारपीट के मामले में आमजन में भी खासा पुलिस की अमानवीय कार्यशैली के खिलाफ का खासा आक्रोश हैं और देश भर के लोग शोसल मीडिया पर मित्र पुलिस की अमानवीयता पर तीखी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। -यूएस न्यूज

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