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नशीली दवाईयों का अवैध कारोबार, मोटी कमाई का लालच और बेखौफ इंसानी जीवन से खिलवाड़


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नशीली दवाईयों का अवैध कारोबार, मोटी कमाई का लालच और बेखौफ इंसानी जीवन से खिलवाड़
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अनिल बिष्ट/हरिद्वार। पंचपुरी में बड़े पैमाने पर नशे का कारोबार फलफूल रहा है। आसपास रहने वाले हजारों नशेड़ी इन मेडिकल स्टोरों पर खुलेआम नशीली दवाइयों की खरीददारी करते है। नशे की इस कारोबार से अब तक कई लोगों की मौत भी हो चुकी है। मगर इस धन्धे पर विराम नही लगा। सूत्रों के अनुसार जिले के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा जांच कराई जाये तो कई मेडिकल स्टोर फर्जी फार्मासिस्ट के नाम पर भी चल रहे हैं। जिन फार्मासिस्टों का नाम दर्शाया गया वो फार्मासिस्ट उन दुकानों पर मौजूद नहीं हैं। यही नही एक लाइसेंस पर एक ही नाम से कई मेडिकल स्टोर भी चल रहे हैैं। एक मेडिकल स्टोर संचालक ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि जितने भी मेडिकल स्टोरों पर नशे का कारोबार किया जा रहा है उसमें संबंधित विभाग की अहम भूमिका है। जिसके लिए बकायदा मेडिकल स्टोर वालों से प्रतिमाह मोटी रकम दिए वसूला जाना की भी खासी चर्चा है। चर्चा हैं कि इन्ही भ्रष्टाचारियों के इशारे पर यह धन्धा पनप रहा है। नशे के इस कारोबार से युवा पीढ़ी पूरी तरह से बर्बाद हो रही है बड़े तो बड़े नाबालिग बच्चे भी नशे के आदी हो चुके हैं। जिससे इन बच्चो का भविष्य खराब हो रहा है। गौरतलब हैं कि विगत वर्ष नवम्बर माह में जिलाधिकारी दीपक रावत ने मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी की थी और खामियां पाई थी । मगर बावजूद उसके मेडिकल स्टोरो पर प्रतिबंधित नशीली दवाओं का कारोबार बदस्तूर जारी हैं। सूचना पर मेडिकल स्टोर में छापा मारने पहुंचे डीएम को खामियां मिली थी। मेडिकल स्टोर पर नशे की दवा सहित अन्य प्रतिबंधित दवा बेचने की शिकायत पर जिलाधिकारी दीपक रावत ने छापेमारी की थी। हालांकि स्टोर पर नशे की दवा तो नहीं मिली। लेकिन लाइसेंस किसी अन्य व्यक्ति के नाम मिलने और दवा बेचने वाला युवक दसवीं पढ़ा लिखा होने पर मेडिकल स्टोर को सील कर दिया गया था। इतना ही नहीं जिलाधिकारी ने ड्रग इंस्पेक्टर का स्पष्टीकरण भी तलब किया था। जिला प्रशासन को मिलने वाली डाक में जिलाधिकारी दीपक रावत को पुराना रानीपुर मोड़ पर स्थित आर्य मेडिकल स्टोर पर अनियमितता की शिकायत का गुमनाम पत्र मिला था। जिसको संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी दीपक रावत ने एसडीएम मनीष सिंह को साथ लेकर आर्य मेडिकल स्टोर पर छापेमारी की। बताया जा रहा हैं कि मेडिकल स्टोर का लाइसेंस जिस व्यक्ति के नाम पर था वह पिछले 6 साल से दुबई में रह रहा है और उसके नाम पर लाइसेंस लगातार रिन्यूवल होता रहा है। इसके अलावा मेडिकल स्टोर संचालक कम पढ़ा लिखा था साथ ही स्टोर पर दवा बेचने वाला युवक दसवीं तक पढ़ा हुआ था। जबकि नियमानुसार मेडिकल स्टोर पर फार्मेसिस्ट डिग्रीधारक ही दवा बेच सकता है। मेडिकल स्टोर पर दवा बेचने के लाइसेंस से लेकर अन्य समस्त अनियमितताएं मिली। जिस पर मेडिकल स्टोर को तत्काल सील कर दिया गया था। छापेमारी के दौरान स्थानीय महिला ने मौके पर पहुंचकर डीएम से शिकायत की कि मेडिकल स्टोर पर नशे की दवा बेची जाती है। इसी मेडिकल स्टोर से दवा खरीदकर उनके सेवन से उसका पुत्र नशेड़ी हो गया है और अपना जीवन बर्बाद कर लिया है। हालांकि जांच में कोई प्रतिबंधित दवा नहीं मिली थी। कारवाई के दौरान डीएम दीपक रावत ने मीडिया को दिए बयान में कहा था कि हरिद्वार में मेडिकल स्टोरों पर भारी अनियमितता बरते जाने की शिकायत लगातार सामने आ रही हैं। कई मेडिकल स्टोर अन्य फार्मेसिस्टों के नाम से संचालित होने की शिकायत भी उनके पास है। अन्य अनियमितताओं पर समस्त मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस के साथ दवाओं की जांच कराई जाएगी। छापेमारी की कारवाई खासा सुर्खियों में रही। लेकिन इस कारवाई के बाद मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी की कारवाई आगे बढ़ती कहीं दिखाई नहीं दी। इस कारवाई के बाद से मेडिकल स्टोरों पर यह धंधा रूका नहीं बल्कि बदस्तूर जारी हैं। लेकिन लोग खुलेआम मेडिकल स्टोरों पर टैबलेट व नशीली सीरप के साथ साथ अन्य कई नशीला पदार्थ बेंच रहे हैं। जिससे देश के भविष्य कहे जाने वाले युवक और युवतियां नशे का सेवन कर पूरी तरह से बर्बाद हो रहे हैं। एक ओर जहां सरकार प्रदेश को नशा मुक्त बनाने का प्रयास कर रही है वहीं अधिकारियों की मिलीभगत से नशे का साम्राज्य स्थापित हो रहा है। इन नशीले पदार्थो को बेंचने वालों पर कोई कार्यवाही न होने से लोग काफी चिंतित है। स्थानीय निवासी विजय कुमार कहा कहना हैं कि कभी शहर में मात्र केवल दो चार मेडिकल स्टोर हुआ करते थे आज गली कूचों में लोगों ने सैकड़ो मेडिकल स्टोर खोल रखे है। जिनकी शैक्षिक योग्यता भी नही है अनपढ़ लोग फर्जी तरीके से मेडिकल स्टोर खोलकर नशीली दवाइयां खुलेआम बेंच रहे हैं। प्रतिबंधित दवाइयों का गोरखधंधा बड़े पैमाने पर चल रहा हैं। दवाइयों के अवैध कारोबार और मोटी कमाई के लालच में बेखौफ होकर इंसानी जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। संबंधित विभागों की घटिया कार्यप्रणाली के कारण नशे की दवाइयां बेचने वाले कुछ केमिस्टों के हौसले इस कदर बुलंदियों पर पहुंच चुके हैं कि शाम ढलते ही उनकी दुकानों पर नशेडियों की टोलियां खरीद-फरोख्त करती नजर आती हैं। मेडिकल स्टोर पर बिना डाॅक्टरों के परामर्श पर्चे के टेबलेट्स, कैप्सूल्स, सीरप व इंजेक्शन्स बेचे जा रहे हैं।

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