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डेंगू का मच्छर मार रहा डंक! न बन जाए कहीं त्रिवेन्द्र सरकार के माथे का कलंक!


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Haridwar:

डेंगू का मच्छर मार रहा डंक! न बन जाए कहीं त्रिवेन्द्र सरकार के माथे का कलंक!
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हरिद्वार। इन दिनों डेंगू का मच्छर डंक मार रहा है। बड़ी संख्या में डेंगू के मरीज सामने आ रहे हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है। शहरी व आसपास के क्षेत्र में डेंगू का कहर बढ़ रहा है। परिवार के परिवार ,हर वर्ग इस बिमारी की चपेट में हैं। संकेत साफ हैं कि अब सावधान व जागरूक होने की जरूरत है। क्योंकि सरकार व सरकारी सिस्टम का जिस तरह का इस महामारी पर रवैया हैं वो किसी से छुपा नहीं हैं। और यह हलात तब हैं जबकि खुद प्रदेश मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के कंधों पर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी हैं। लेकिन सरकार का डेंगू से निपटने से ज्यादा फोकस अगामी कंुभ पर्व पर हैं। तमाम बैठकों में डेंगू से निपटने का कहीं कोई जिक्र नहीं आया । ऐसी स्थिति में सरकार ने इससे निपटने के क्या-क्या इंतजाम किए हुए हैं? सरकारी अस्पतालों इस बीमारी के मरीजों को सुविधा संबंधी व कौन-कौन सरकारी पेशा लोगों को इस कार्य की देख रेख में लगाया गया है? डेंगू पीड़ित क्षेत्रों में छिड़काव आदि की व्यवस्था व निगरानी के लिए कौन अधिकारी और कौन-कौन सी टीम लगी हैं? ऐसे तमाम सवाल हैं जिन पर सरकार निरूत्तर हैं। इसी वजह से डेंगू का कहर प्रदेश सरकार के इंतजाम नाकाम नजर आते हैं। इस बिमारी की रोकथाम में मुख्यमंत्री का स्वास्थ्य विभाग नाकाम रहा हैं और तत्कालीन हरीश सरकार जिस तरीके से त्रिवेन्द्र सरकार पर नाकारा और नाकाम होने का ठीकरा फोड रही हैं , उससे कहीं डेंगू का डंक त्रिवेन्द्र सरकार के माथे का कलंक न बन जाए! मुख्यमंत्री व नौकरशाह संतों के इर्द गिर्द फेरे लगाते दिखाई। इस महामारी से निपटने की चिंता/ गंभीरता पर सरकार खामोश दिखाई दी। वीआईपी की अगुवाई में लगा प्रशासन भी इस मामले में खानापूर्ति करता नजर आ रहा हैं। डेंगू से निपटने के इंतजाम के स्थान पर प्रशासन मात्र आंकड़े जुटाने पर लगा हुआ है। नगर निगम आपसी राजनीति में इतना व्यस्त हैं कि निगम क्षेत्र की जनता से उसे दूर - दूर तक का कोई सरोकार ही नहीं रह गया । तमाम कीट नाशक दवाईयों इस पूरे मामले में देखा जाए तो सरकार भी पूर्ण तरह इस डेंगू की रोकथाम के लिए कुछ खास करती नजर नहीं आई। रोकथाम तो दूर की बात हैं रोगग्रस्त आमजन का अस्पतालों में इलाज के दौरान उनका हालचाल जानने के लिए तक नहीं पहुंची । लोग सरकारी अस्पतालों में इलाज को तरसते रहे और प्रदेश सरकार का कुनबा कुंभ कार्यो की तैयारियों में देरी से नाराज संतों को मानने के लिए मठाधीशों के आश्रमों में फेरा लगाती रही। इस विषय को लेकर विगत दिनों पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सरकार पर डेंगू से निपटने में नाकाम रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हालत यह है कि जिले में डेंगू हर रोज एक जान ले रहा है। लेकिन डेंगू से निपटने के लिए कोई ठोस कदम उठाने के बजाय त्रिवेन्द्र सरकार अब ठंड होने का इंतजार कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पर विधायक ममता राकेश की अगुवाई में दिए गए धरने में भी शामिल हुए। उन्होंने त्रिवेंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जो ब्लड जांच की मशीनें, कंपोनेंट सेपरेटर उन्होंने अपने कार्यकाल में लगवाए थे, उन्हीं से लोगों की जांच हो रही है और ब्लड प्लेटलेट्स मिल रहा है। गलियों में फाॅगिंग से मच्छर घरों में घुस रहा है, जिससे लोग बीमार हो रहे हैं। इस दौरान उन्होंने भगवानपुर क्षेत्र में डेंगू से मरीजों की मौत का भी मसला उठाया। सरकार अपनी नाकामी पर पर्दा डालने के लिए आंकड़ों से खिलवाड़ कर रही है। लेकिन पांच साल के लिए उत्तराखण्ड की जनता द्वारा चुनी सरकार का प्रचंड का घमंड अभी टूटने में नहीं आ रहा हैं। सरकार की बेशर्मी ही कही जा सकती हैं जो कि डेंगू पर नाकाम होने पर जबाबदेही से भाग रही सरकार डेंगू से निपटने के इंतजाम पर खामोश हैं और शीत लहर का इंतजार कर रही हैं। लेकिन जिन परिवारों ने यह दर्द झेला हैं उनका क्या कसूर? उन्होंने तो सरकार पर अपना भरोसा जताया था? कि सरकार अपने वायदों पर खरा उतरेगी ? लेकिन सरकार वायदाखोर निकलेगी ? इसका जबाब शायद उन्हें इस महामारी में मिल गया हैं।

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