X Close
X

खाकी की साख पर धब्बा! नेपाली यात्रियों से 56 हजार की लूट का खुलासा


Haridwar-Police-0409
अनिल बिष्ट/ हरिद्वार: उत्तराखंड की मित्र पुलिस की एक हरकत ने खाकी की साख पर धब्बा लगा दिया। जानकारी के मुताबिक बीते शुक्रवार हिमाचल शिमला में दिहाड़ी मजूदरी करने वाले पड़ोसी देश नेपाल के 4 लोग रोहड़ से हरिद्वार पहुंचे थे। जिन्हें रोपहड़िया बस से नेपाल बार्डर जाना था। मगर बस आने से पहले ही उनके साथ देवभूमि में ऐसा घट जिसके उन्हें उम्मीद भी नहीं थी।

नगर कोतवाली अंतर्गत आने वाली मायापुर चैकी मंे तैनात सिपाही ने न सिर्फ इन लोगों के साथ मारपीट की बल्कि मेहनत मजदूरी करके कमाए गए जमा पूंजी को भी लूट लिया। नेपाली मूल के लोगों को ने मायापुर चैकी के सिपाही पर 56 हजार लूटने का आरोप लगाया हैं।

घटना हरिद्वार बस अड्डे की है जंहा पर जानकारी के अनुसार सिपाही मनीष कुमार ने नेपाल जा रहे चार युवको से 56 हजार रुपये लूट लिये। यही नही नेपाली युवकों ने मनीष पर पिटाई करने का भी आरोप लगाया। इन लोगों के अनुसार मनीष ने सारे पैसे लेने के बाद उन्हे दस हजार रुपये दिये और वापस घर चले जाने को कहा। बात जब रोडवेज कर्मियों तक पहुंची तो उन्होने मायापुर चैकी में इसकी लिखित शिकायत की।

लेकिन चैकाने वाली बात यह है कि बिना अधिकारियों के संज्ञान में लाए मामला चैकी स्तर से निपटाए जाने की कोशिश की जा रही थी। इतना ही नहीं मीडिया से इस बात को छुपाया जा रहा था। वो तो भला हो मायापुर चैकी भवन में स्थित एलआईयू विभाग का जिसने समय से मामले की गंभीरता को देखते हुए सूचना एस.एस.पी. को दे दी अन्यथा मामला पकड़ में ही न आता और चैकी स्तर से ही निपट लिया जाता। एस.एस.पी. ने मायापुर चैकी पर पहुंचकर घटनाक्रम की जानकारी पीड़ित पक्ष से ली और सिपाही पर कारवाई के आदेश दिए। घटना शुक्रवार रात 10 बजे के आस पास की हैं जब शिमला में सेब के बाग में मजदूरी करने वाली नेपाली मूल के 4 युवक जिन्हें हरिद्वार से रूपेड़िया जाना था परन्तु गाड़ी छुट जाने के कारण उन्हें स्टेशन पर ही रूकना पड़ा। नेपाली मूल के नंद कार्की  का कहना है कि हम सब बस स्टैंड पर रात को सोने की तैयारी कर रहें थे उसी समय उत्तराखण्ड पुलिस का सिपाही मनीष जिसकी डड्ढूटी हरिद्वार रोडवेज स्टैंड पर थी वहां आया और युवकों पर अपना रौब जमाते हुए उनके पास से करीब 56 हजार रूपये ले लिए।

नेपाली युवकों के हाथ पाव जोड़ने के बाद सिपाही ने दो युवकों को 5-5 हजार रूपये किराये के दे दिए परन्तु बाकी पैसे अपने पास रख लिए। दो लोगों को वापिस भेज दिए। छोड़े गए युवकों ने अपन आपबीती कैश काउंटर पर उपस्थित रफल सिंह को दी। बात खुल न जाए के डर से सिपाही ने उन दो व्यक्तियों को जिनकों रोका हुआ था 16 हजार रूपए देते हुए गाड़ी पकड़कर निकल जाने के लिए कहा और उनसे कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवा लिए। इसके बाद यह बात आस पास के लोगों में भी फैल गई और दोनो व्यक्तियों के साथ युवकों ने हिम्मत दिखाते हुए सारे पैसे लिए बगैर नेपाल नहीं जाने का मन बना लिया। सुबह होते ही कैशियर ने रोड़वेज यूनियन के लोगों को पफोन पर घटना की जानकारी दी। जिसके बाद रोडवेज कर्मचारी सौराज सिंह आदि ने सीसी टीवी में जांच की तो पता चला कि नेपाली युवकों को ठगने वाला और कोई नहीं उत्तराखण्ड पुलिस का सिपाही है। जिसके बाद रोडवेज कर्मचारियों ने घटना की जानकारी सम्बन्ध्ति मायापुरी चैकी प्रभारी को दी गई।

मामला रफा दफा करने के लिए रोडवेज कर्मियों से वार्ता चल रही थी। मामले की भनक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के कानों तक भी जा पहुंची। जिसके बाद खुद पुलिस कप्तान भी मौके पर पहुंचे और आरोपी पुलिसकर्मी मनीष रावत सहित नेपालीमूल के युवकों से पूछताछ की।

मामले में एसपी सिटी ने कहा कि आरोपी चाहे पुलिसकर्मी ही क्यों ना हो परन्तु उसके साथ वैसा ही वर्ताव किया जाएगा जैसा कि एक आम आदमी के साथ किया जाता है। उन्होंने बताया कि जांच के बाद आरोपी के खिलाफ सम्बन्धी धाराओं में मामला दर्ज गया हैं। यह पहला मामला नहीं हैं कि मित्र पुलिस किसी एक मनीष रावत की की वजह से दागदार हुई हो इस तरह के मामले पूर्व में भी सामने आ चुके हैं। जहां पुलिस को अपने कर्मचारी की हरकतों के कारण न सिर्फ शर्मदिंगी उठानी पड़ी हैं बल्कि पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवालिया निशान लगे हैं। (UTTARAKHAND STAMBH NEWS)
Uttarakhand Stambh News