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अनशनरत संत गोपाल दास को जबरन उठाया


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Haridwar:

हरिद्वार । प्रशासन ने मातृ सदन में अनशनरत संत गोपाल दास को जबरन उठाकर एम्बुलेंस के माध्यम से उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती कराने के लिए भेजा । इससे पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों ने संत गोपाल दास ने प्रशासनिक टीम आते देख अपने को कमरे में बंद कर लिया था। टीम अपने साथ दरवाजा काटने के लिए कटर लेकर मातृ सदन पहुंचीं थी । कमरे से बाहर आने के लिए चेकअप व जल लेने के लिए लम्बे चले वार्तालाप के बाद बमुश्किल उन्हें मनाया जा सका। एक बारगी तो प्रशासन व पुलिस के हाथ पांव फूल गए जब संत उनसे छूटकर दौड़ लगाने लगे । दरअसल संत गोपाल दास दौड़ और उछल-कूद कर प्रशासनिक टीम को यह समझाने का प्रयास कर रह थे कि वह पूर्ण रूप से फीट हैं । इस दौरान मातृ सदन के संतों से प्रशासनिक टीम की नोंक-झोंक भी हुई ।
गौरतलब हैं कि बीते दिन प्रशासन ने एम्स से डिस्चार्ज कराकर संत गोपाल दास को मातृ सदन में छोड़ा था। बीते दिन से संत गोपाल दास ने जल त्यागा हुआ था और वे मौन व्रत पर थे। एसडीएम मनीष सिंह सहित कनखल सीओ स्वप्न किशोर , तहसीलदार सुनैना राणा , कनखल थानाध्यक्ष ओमकांत भूषण , भारी पुलिस के साथ चिकित्सकों की टीम मातृ सदन पहुंचीं थी। इस कारवाई से पूर्व संत गोपाल दास के जीवन रक्षा व किसी उपद्रव के एहतियात के तौर पर 144 लागू की गई थी। वहीं मातृ सदन ने प्रशासन की कारवाई पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि प्रशासन संत गोपाल दास को एक दिन पहले मातृ सदन लेकर आता हैं और दूसरे दिन उठा कर ले जाता हैं तो संत गोपाल दास को मातृ सदन के सुपुर्द आखिर क्यो किया गया? स्वामी शिवानंद ने कहा कि वह 20 अक्तूबर को अनशन पर बैठने की तिथि की घोषणा करेंगे । उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन भी उनके अनशन पर बैठने की इंतजार में हैं । ताकि उन्हें भी अनशन से उठाकर सानंद की तरह उनकी भी हत्या कर दिया जाए । उन्होंने कहा कि इस बात का एहसास उन्हें ईश्वरीय शक्ति से अनशन पूर्व ही हो गया हैं ।
उधर एसडीएम मनीष सिंह ने कहा हैं कि संत गोपाल दास ने कल से जल त्यागा हुआ हैं और चूंकि वह लम्बे समय से अनशन पर हैं । इसलिए उनकी जीवन रक्षा के लिए उन्हें उपचार हेतु ऋषिकेश स्थित अस्पताल भेजा जा रहा हैं ।

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